Monday, February 24, 2020

महिला अधिकारों के लिये लड़ने वाली प्रियंका की हत्या

क्या आप एसडी24 के साथ पत्रकारिता करना चाहते है ? तो हमें लिखे socialdiary121@gmail.com
SD24 News Network
बेगुसराय में महिला अधिकारों के लिये लड़ने वाली प्रियंका की हत्या कर दी गयी है। प्रियंका का कसूर यही था कि वह महिला अधिकारों की लड़ाई निजी तौर पर लड़ रही थी.उसे मनु-ष्यसत्तावादी व्यवस्था ने मार दिया है।यह समाज स्त्रियों को घूंघट, साडी में घोंट कर मार डालना चाहता है। जब कोई स्त्री महिला आजादी की मांग उठाती है तो कभी उसके चरित्र, कभी शरीर और कभी उसके जीवन को निशाना बनाया जाता है।
कब तक स्त्रियां मारी जाती रहेंगी। आखिर कब तक?


क्या अपने अधिकार में आवाज उठाने वालों का यही हश्र होगा ? फिर क्यों सरकार बेटी पढाओ बेटी बचाओ जैसे नारों को दिन रात चरितार्थ करने व औरतों की फजीहत करवाने में लगी हुई है, जिसमें वे धर्माधिकारी व धर्मान्त रुढिवादी व अंधविश्वासी लोग भी शामिल हैं जो, किसी भी तरहं से रुढ़िवादी परम्पराएं व सामाजिक कुरीतियों को बनाए रखना व हर किसी पर थोपना चाहते हैं


लाश की सूचना पाकर नगर थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की छानबीन में जुट गई। मामला 20 फरवरी सोमवार रात का है। पुलिस की मौजूदगी में गांव वालों ने गड्डे खोदकर लड़की की लाश बाहर निकाली, तो देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस हत्या ने सबको हिलाकर रख दिया है।

एक बार फिर से हमारे समाज ने लड़कियों को उनकी असल जगह दिखा दी है। महिलाओं को इस बात का सबूत दिया गया है कि अगर वो अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़ीं तो उनका यही हाल होगा। बेहुसराय की रहने वाली प्रियंका का भी यही हाल हुआ। अपने अधिकारों के लिए लड़ने की सजा ऐसी कि हर कोई कांप जाए। प्रियंका का कसूर सिर्फ इतना ही था कि वो महिला अधिकारों के लिए लड़ रही थी।

प्रियंका की हत्या से साबित करती है कि ये समाज महिलाओं को बुर्के और घूंघट में दम घोंट देना चाहता है। समाज महिलाओं को ये बताना चाहता है कि सड़क पर निकलोगी तो रेप की शिकार होगी और अगर पुरुषसत्तावादी व्यवस्था के खिलाफ खड़ी होगी तो मार दी जाओगी। अब तक महिलाएं अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों को सहते आ रही थीं, लेकिन जब अत्याचार के खिलाफ लड़ना शुरू कीं तो क्या हुआ उनकी हत्या करके हमेशा के लिए मुंह बंद कर दिया गया। यहां भी वही हुआ ना...प्रियंका ने भी महिला अधिकार के लिए आवाज उठाई और इस पुरुषवादी व्यवस्था ने उसके मुंह पर मिट्ठी ठूस दी गई।

बता दें कि पुलिस की घंटों मसक्कत के बाद शव की पहचान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बड़ी एघु निवासी सुधीर मिश्रा की 24 साल की बेटी प्रियंका कुमारी के रूप में की गई। परिजनों ने पुलिस को बताया कि लव मैरिज में अंतरजातीय विवाह करने पर प्रेमी पति और उसके घरवालों ने प्रियंका की हत्या कर सबूत छिपाने की नीयत से शव को ट्रस्ट की जमीन में दफना दिया।

बताया जा रहा है कि उक्त मुहल्ले से बीती रात ई-रिक्शे से चार बैटरियां चोरी हो गई थीं। बैटरी खोजने के दौरान लोग खेत में मिट्टी की ऊंचाई देखा तो उन्हें आशंका हुई कि चोरों ने खेत में ही बैटरियों को गाड़ दिया है। मिट्टी हटाई तो लड़की के बाल और हाथ दिखे। ये देखते ही वहां मौजूद लोग दंग रह गए। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस पहुंचने पर मिट्टी खोद कर शव को निकला। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। साथ ही अपराधियों को पकड़ने में जुटी हुई है।

परिजनों ने बताया कि पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रियंका झारखंड के रांची में एक कंपनी में जॉब करती थी। फेसबुक के जरिए प्रियंका को गांव के ही कुणाल नाम के शख्स से प्यार हो गया। कुणाल भी रांची में ही पढ़ाई करता था। दोनों के बीच नजदीकी बढ़ती गई। दोनों के बीच प्यार इस कदर बढ़ गया कि उन्होंने 4 अगस्त 2017 को रांची के एक मंदिर में शादी कर ली। अलग जाति में शादी करने की वजह से प्रियंका को ससुराल वालों ने ठुकरा दिया। प्रियंका के घर वालों ने ना सिर्फ उसे बहु मानने से इंकार किया बल्कि उसे घर से बेदखल कर दिया। कुछ दिन तक प्रियंका और कुणाल दोनों एक किराए के घर में रहने लगे। फिर झांसा देकर प्रियंका को दिल्ली भेज दिया व कुणाल खुद बेगूसराय लौट आया। कुणाल चोरी-छिपे दूसरी शादी रचाने की तैयारी कर रहा था कि इसकी भनक प्रियंका को लग गई।

लेकिन महीनों बीतने के बाद पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर सकी। नतीजा हुआ कि उसकी हत्या कर दी गई। लोगों का कहना था कि यदि पुलिस कार्रवाई करती तो प्रियंका की जान बच सकती थी। जानकारी के मुताबिक, प्रियंका ने इंसाफ के लिए DIG से लेकर SP तक गुहार लगाई। लेकिन प्रियंका की गुहार व चीख दब कर रह गई। पुलिस न तो प्रियंका को सुरक्षा दे पाई और न ही आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी।

No comments:

Recent Comments