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Monday, April 6, 2020

Nizamuddin : हाईकोर्ट से सरकार बोली एक भी जमाती नहीं है कोरोना संक्रमित

Nizamuddin : हाईकोर्ट से सरकार बोली एक भी जमाती नहीं है कोरोना संक्रमित
SD24 News Network
Nizamuddin : हाईकोर्ट से सरकार बोली एक भी जमाती नहीं है कोरोना संक्रमित
अहमदाबाद : हाई कोर्ट में ये भी सरकार ने स्वीकार किया है कि गुजरात राज्य में कोई भी विदेशी टूरिस्ट ऐसा नहीं है जिसको ये माना जाए कि वह जमात तबलीग मरकज गया था ।

हाई कोर्ट को सरकार ने बताया कि कुल 84 व्यक्ति ऐसे पाए गए जो 1 मार्च  2020 से 22 मार्च 2020 के बीच तबलीग मरकज गए। इनमें 1 व्यक्ति कॉविद 19 से पीड़ित पाया गया जिसकी पहले ही मृत्यु हो गई । शेष 83 में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए और उनकी पूरी जांच की जा चुकी है। इनकी सूची है ।

कुल 1350 संभावित संक्रमित पीड़ितों की सूची में 1282 को तलाश  कर लिया गया और 68 की तलाश जारी है। हाई कोर्ट को बताया गया कि लॉक डाउन की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र की ओर से लोगों ने गुजरात में प्रवेश के प्रयास किए।

हाई कोर्ट को सरकार ने बताया कि इन उपरोक्त 84 लोगों में 11 को टेक्निकल इंटेलिजेंस  के आधार पर चिन्हित किया गया (उनका कॉल रिकॉर्ड देखकर, उनका रूट देखा गया कि वे कहां कहां गए) और 73 के संबंध में अन्य सूत्रों से सूचनाएं प्राप्त की गईं ।

प्रश्न ये है कि जब ये कोविद 19 से पीड़ित ही नहीं पाए गए तो फिर तब्लीगी जमात को निशाना क्यूं बनाया जा रहा है ?

जमात मरकज द्वारा  जारी सूचना के अनुसार  21मार्च को 1746 लोग मरकज में थे जिन में 1530 लोग भारतीय और 216 विदेशी थे। 824 विदेशी भारत के विभिन्न  इलाकों में थे। इसकी सूचना राज्य पुलिस को दी गई थी।मरकज से मिले  1203 लोगों की मेडीकल स्क्रीनिंग की गई तो 303 मामले पॉजिटिव कॉविद 19 के सामने आए जो कि नरेला, बक्करवाला, और सुल्तानपुरी के Quarantine केंद्रों में हैं। 

मरकज के अनुसार 1जनवरी से लगभग 2100 विदेशी भारत आए, जबकि उनमें अधिकांश वापस हो गए और 21मार्च 20 को 216 ही मरकज में थे और 824 देश के विभिन्न हिस्सों में थे जिनकी जानकारी पुलिस को दी गई थी।

विदेश से टूरिस्ट वीजा पर आने वाले लोग , जमात मरकज भी आते हैं जो यहां इस्लामी विद्वानों की तकरीरों को सुनते हैं ,अपने  नोट्स लिखते हैं, और अनुभव लेते हैं। याद रहे कि ये कोई मिशनरी कार्य नहीं है जैसा कि ईसाई मिशनरी करती हैं। ये मुस्लिम तब्लीगी भारत सरकार से मिशनरी वीजा नहीं ले सकते इसके कई तकनीकी बिंदु हैं । टूरिस्ट वीजा का उल्लंघन तब होता है । जब कोई टूरिस्ट भारत में शिक्षा हासिल करने लगे या नौकरी , व्यापार या कांफ्रेंस  करने लगे अथवा कोई लाभ अर्जित करने लगे। केवल एक श्रोता के रूप में मस्जिद में बैठ कर सुनना और नमाज़ का पढ़ना और रात गुजार लेना, टूरिस्ट वीजा का उल्लंघन नहीं होता। ऐसा कोई प्रतिबंध टूरिस्ट वीजा जारी करते समय नहीं लगाया गया होता है। 

कनिका कपूर एयरपोर्ट से आसानी से  बाहर आ गईं , इसी तरह अनेक लोग होंगे जिनका इस्लाम या तब्लीगी मरकज से कोई लेना देना नहीं। उन को नहीं तलाश किया जा रहा है, और सरकारें सारा ठीकरा मुस्लिमों/तबलीग मरकज के सर पर फोड़ रही है, और अपनी गलतियों पर पर्दा डाल रही है। जनवरी से ही स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। संक्रमण फैलने के अनेक केंद्र होते हैं जैसे बंदरगाह, एयर पोर्ट, होटल, बाज़ार, ट्रेन, बसें,  सिनेमा हॉल व टूरिस्ट स्पॉट आदि , जहां विदेशी आते हैं।

अमरीकियों के भारत आने पर आज भी प्रतिबंध नहीं है। 18 मार्च को जारी भारत सरकार की एडवाइजरी को भी पढ़ लीजिए उसमें कई देशों  के लोगों को Quarantine करने से छूट दी गई है और ये वही देश हैं जिनमें covid 19 का संक्रमण नहीं फैला था। इन्हीं देशों से मुस्लिम तब्लीगी मरकज में आए थे। देखें मेरी पोस्ट दिनांक 5 अप्रैल 2020.

गोदी मीडिया ने सबसे अधिक दुष्प्रचार किया।
लेकिन हर भारतीय को संवेदनशील होकर रहना चाहिए और हर सावधानी बरतनी चाहिए और सरकारी निर्देशों का पालन करना चाहिए , ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। देश की सुरक्षा से बड़ा कोई नहीं। धर्म किसी भी नागरिक का निजी मामला है मगर कानून का पालन करना उसका देश के प्रति कर्तव्य है और उसकी जागरूकता का प्रमाण है । इसके अलावा अभी बहुत से  तथ्य और विधिक संबंधी  प्रश्न हैं जिनका जवाब  चाहिए। मान्य  हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 17 अप्रैल 2020 को होगी ।

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